भारत में AI डेटा सेंटर निवेश 2026: पानी, बिजली और स्थानीय लोगों की चिंताएँ
Artificial Intelligence (AI), Cloud Computing और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण भारत में Data Centres के निर्माण और विस्तार की योजनाएँ तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ये केंद्र बैंकिंग, सरकारी डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और AI मॉडल चलाने के लिए जरूरी Computing Infrastructure उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बड़े Data Centres को लगातार बिजली, Cooling Systems, भूमि और मजबूत नेटवर्क की जरूरत होती है। अक्टूबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों ने इस विकास के साथ स्थानीय समुदायों की चिंताओं को भी चर्चा में ला दिया है। मुंबई के पास Amazon की परियोजना और आंध्र प्रदेश में Google की प्रस्तावित Data Centre परियोजना के आसपास पानी, बिजली, पर्यावरण और स्थानीय लोगों से परामर्श जैसे मुद्दे उठे हैं।
AI Data Centre Investment 2026: मुख्य तथ्य
| स्थापित क्षमता | अगस्त 2026 में लगभग 1.57 GW |
|---|---|
| 2030 का अनुमान | लगभग 8 GW डेटा सेंटर क्षमता |
| निवेश का परिदृश्य | सरकारी जानकारी के अनुसार लगभग 70 अरब डॉलर के निवेश पर काम जारी और लगभग 90 अरब डॉलर की अतिरिक्त परियोजनाएँ घोषित |
| प्रमुख निवेशक | Amazon, Google, Microsoft सहित अन्य कंपनियाँ |
| प्रमुख स्थानीय मुद्दे | पानी, बिजली, भूमि उपयोग, पेड़ों की कटाई, शोर और सार्वजनिक परामर्श |
| संबंधित क्षेत्र | महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और अन्य डेटा सेंटर निवेश केंद्र |
| स्थिति | निवेश विस्तार के साथ पर्यावरणीय और सामुदायिक प्रभावों पर चर्चा जारी |
नोट: क्षमता और निवेश संबंधी आंकड़े सरकारी प्रकाशित जानकारी में दिए गए अनुमान तथा परियोजना-स्तरीय घोषणाओं पर आधारित हैं। घोषित निवेश को पूरा हो चुका निवेश नहीं समझना चाहिए।
AI Data Centre क्या होता है?
Data Centre एक ऐसी सुविधा है जहाँ Servers, Storage Systems, Networking Equipment और संबंधित तकनीकी Infrastructure रखा जाता है। इनका उपयोग डिजिटल जानकारी को संग्रहित करने, Processing करने और ऑनलाइन सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए होता है।
AI Data Centres में सामान्य Data Centres की तुलना में कई मामलों में अधिक Computing Power वाले Servers और Accelerators का उपयोग होता है। AI मॉडल की Training और Inference के दौरान बड़ी मात्रा में गणना करनी पड़ सकती है, इसलिए बिजली आपूर्ति, तापमान नियंत्रण और नेटवर्क क्षमता महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इन केंद्रों का उपयोग Banking, E-Governance, Cloud Applications, Video Streaming, Enterprise Software और Generative AI Services जैसी सेवाओं को चलाने में हो सकता है। इसलिए डेटा सेंटर अब डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण Infrastructure का हिस्सा बन चुके हैं।
भारत में डेटा सेंटर निवेश क्यों बढ़ रहा है?
भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार, Internet Traffic, Cloud Adoption और AI Applications की मांग डेटा सेंटर क्षमता की जरूरत बढ़ा रही है। कंपनियों को ऐसे Infrastructure की जरूरत होती है जहाँ Computing Resources बड़े स्तर पर उपलब्ध हों और डिजिटल सेवाएँ लगातार संचालित की जा सकें।
भारत की बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था, Telecom Connectivity, तकनीकी प्रतिभा और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव इसे Data Centre Infrastructure के लिए महत्वपूर्ण स्थान बनाते हैं। केंद्र सरकार ने भी Data Centres को Infrastructure Status देने, IT Hardware Manufacturing और AI Ecosystem से जुड़ी पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र को समर्थन दिया है।
सरकार की 14 सितंबर 2026 की PIB जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत की स्थापित डेटा सेंटर बिजली क्षमता लगभग 1.57 GW थी और 2030 तक इसके लगभग 8 GW तक पहुँचने का अनुमान था। उसी जानकारी में लगभग 70 अरब डॉलर के निवेश पर काम जारी होने और अतिरिक्त 90 अरब डॉलर की घोषित परियोजनाओं का उल्लेख किया गया।
ये आंकड़े क्षेत्र के विस्तार का संकेत देते हैं, लेकिन सभी घोषित परियोजनाएँ एक ही समय पर पूरी होंगी, ऐसा जरूरी नहीं है। निर्माण, बिजली कनेक्शन, भूमि, वित्त और नियामकीय मंजूरियों के आधार पर परियोजनाओं की समय-सीमा अलग हो सकती है।
Amazon, Google और Microsoft की निवेश योजनाएँ
भारत में बड़े Technology Companies AI और Cloud Infrastructure के विस्तार के लिए निवेश योजनाएँ बना रही हैं। Reuters की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में Amazon, Google और Microsoft की परियोजनाओं के साथ स्थानीय समुदायों की चिंताओं का उल्लेख किया गया।
| कंपनी | रिपोर्ट में बताया गया निवेश | संदर्भ |
|---|---|---|
| Amazon | 2030 तक भारत में AI Infrastructure के लिए 21 अरब डॉलर की नियोजित निवेश राशि | मुंबई के पास डेटा सेंटर परियोजना और स्थानीय विरोध |
| आंध्र प्रदेश परियोजना के लिए 15 अरब डॉलर की रिपोर्ट की गई योजना | पानी, बिजली, वन्यजीव और भूमि उपयोग को लेकर सवाल | |
| Microsoft | चार वर्षों में 20.5 अरब डॉलर की निवेश योजना | रिपोर्ट के अनुसार, इसका बड़ा हिस्सा AI Data Centres के लिए निर्धारित है |
इन रकमों को कंपनियों की घोषित या नियोजित निवेश योजनाओं के रूप में समझना चाहिए। अलग-अलग घोषणाओं की समय-सीमा और दायरा अलग हो सकते हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर किसी एक अवधि में खर्च हो चुकी कुल राशि नहीं मानना चाहिए।
मुंबई के पास Amazon परियोजना को लेकर स्थानीय चिंताएँ
Reuters की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के पास Amazon की प्रस्तावित 54-acre डेटा सेंटर सुविधा को लेकर कुछ स्थानीय निवासियों ने विरोध जताया। रिपोर्ट में पेड़ों की कटाई, बिजली और पानी की उपलब्धता, शोर तथा आवासीय क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर लोगों की चिंताओं का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1,000 से अधिक स्थानीय निवासियों ने कहा कि परियोजना आगे बढ़ाने से पहले उनके साथ पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया। कुछ निवासियों ने साइट के पास विरोध प्रदर्शन किए और परियोजना को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की।
Amazon ने Reuters को बताया कि परियोजना में Water-free Cooling, घरों से अलग Dedicated Power Supply और Noise Mitigation Measures का उपयोग किया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि हटाए गए पेड़ों की तुलना में अधिक पौधे लगाए गए हैं। स्थानीय चिंताओं और कंपनी के जवाब को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है; परियोजना के वास्तविक प्रभावों का आकलन उपलब्ध आंकड़ों और स्वतंत्र निगरानी के आधार पर किया जाना चाहिए।
यह मामला दिखाता है कि बड़े Infrastructure Projects में तकनीकी और आर्थिक लाभों के साथ स्थानीय निवासियों को समय पर जानकारी देना, शिकायतों का समाधान करना और प्रभावों की निगरानी करना भी महत्वपूर्ण है।
आंध्र प्रदेश में Google परियोजना पर क्या सवाल उठे?
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में Google की 15 अरब डॉलर की बताई गई Data Centre परियोजना को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। इन चिंताओं में पानी और बिजली की उपलब्धता, वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव तथा एक मंदिर की भूमि के उपयोग से जुड़ा विवाद शामिल बताया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि Google और राज्य सरकार ने गलत काम किए जाने के आरोपों से इनकार किया। इसलिए इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। भूमि के स्वामित्व, अनुमति और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और सक्षम संस्थाओं की आधिकारिक जानकारी देखना आवश्यक है।
इस तरह के विवादों में भूमि संबंधी दस्तावेज, परियोजना की मंजूरियाँ, जल और बिजली की व्यवस्था तथा स्थानीय समुदाय से परामर्श के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं।
डेटा सेंटर और पानी की खपत का मुद्दा
Data Centres में Servers लगातार काम करते हैं और उनसे गर्मी पैदा होती है। तापमान नियंत्रित रखने के लिए Cooling Systems की जरूरत होती है। इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक के आधार पर पानी की खपत काफी अलग हो सकती है। कुछ प्रणालियाँ पानी का उपयोग करती हैं, जबकि कुछ Air Cooling या अन्य विकल्पों पर निर्भर करती हैं।
भारत में पानी की उपलब्धता हर क्षेत्र में समान नहीं है। यदि कोई बड़ा Data Centre ऐसे इलाके में बनाया जाता है जहाँ पहले से घरेलू जरूरतों, खेती और उद्योगों के लिए पानी का दबाव है, तो स्थानीय जल संसाधनों पर प्रभाव का आकलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
DW की अगस्त 2026 की रिपोर्ट ने भारत में डेटा सेंटर विस्तार और पानी की कमी के बीच संभावित तनाव पर प्रकाश डाला। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई डेटा सेंटर ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहाँ Water Stress का जोखिम मौजूद है। किसी विशेष परियोजना का प्रभाव जानने के लिए उसकी वास्तविक Water Consumption, स्रोत और Recycling व्यवस्था का अलग मूल्यांकन जरूरी है।
पानी के प्रभाव को कम करने के संभावित उपाय
- जहाँ तकनीकी रूप से संभव हो, Water-free या कम पानी इस्तेमाल करने वाली Cooling Systems अपनाना।
- Treated Wastewater और Recycled Water के उपयोग की संभावनाएँ देखना।
- स्थानीय जल उपलब्धता और मौसमी कमी को ध्यान में रखकर Water Balance Assessment तैयार करना।
- परियोजना की वास्तविक जल खपत और स्रोतों की नियमित निगरानी करना।
- स्थानीय प्रशासन और निवासियों के लिए जल उपयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना।
बिजली की मांग और स्थानीय बिजली आपूर्ति
AI Data Centres को Servers, Networking Equipment और Cooling Systems चलाने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है। बड़े परिसर की मांग स्थानीय Distribution Network, Substations और Transmission Infrastructure की योजना को प्रभावित कर सकती है।
यदि किसी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पहले से सीमित है, तो नए बड़े उपभोक्ता के जुड़ने से अतिरिक्त Infrastructure की जरूरत हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि हर डेटा सेंटर के कारण घरों की बिजली कटेगी या बिल बढ़ेंगे। वास्तविक प्रभाव परियोजना की Dedicated Supply, Grid Connection, नए बिजली ढाँचे, Power Purchase Arrangements और स्थानीय वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
इसलिए परियोजना की समीक्षा में केवल कुल बिजली मांग नहीं, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि बिजली कहाँ से आएगी, क्या अतिरिक्त Grid Capacity की जरूरत है, Backup Systems कैसे काम करेंगे और बिजली आपूर्ति की लागत कौन वहन करेगा। Renewable Energy का उपयोग और Energy Efficiency भी महत्वपूर्ण विषय हैं।
पेड़ों की कटाई, शोर और आसपास के घरों पर असर
बड़े Data Centres के निर्माण के लिए भूमि, भवन, बिजली उपकरण और Cooling Infrastructure की जरूरत होती है। साइट की स्थिति और निर्माण योजना के अनुसार पेड़ों की कटाई, निर्माण गतिविधियों, ट्रकों की आवाजाही, जनरेटर और Cooling Equipment से शोर जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं।
आवासीय इलाकों के नजदीक ऐसी परियोजनाओं में Noise Assessment, उचित दूरी, ध्वनि-रोधक उपाय, हरित क्षेत्र और निर्माण समय-सीमा जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों के लिए शिकायत दर्ज करने और उसका समाधान पाने की स्पष्ट व्यवस्था भी उपयोगी है।
किसी परियोजना से घरों की कीमतों पर प्रभाव पड़ने के दावे को प्रमाणित करने के लिए स्थानीय संपत्ति बाजार के आंकड़े और समय के साथ बदलाव का अध्ययन आवश्यक है। केवल लोगों की आशंका को बाजार में गिरावट का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्या AI Data Centres को Environmental Clearance की जरूरत होती है?
Ministry of Environment, Forest and Climate Change से संबंधित 6 अगस्त 2026 की PIB जानकारी के अनुसार, AI Data Centres को अपने आप में Environmental Impact Assessment (EIA) Notification, 2006 के तहत अलग श्रेणी के रूप में पूर्व Environmental Clearance की जरूरत नहीं होती।
हालाँकि, यदि Data Centre किसी Building and Construction Project की ऐसी श्रेणी में आता है जिसका Built-up Area 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, या Township and Area Development Project की लागू सीमाओं के अंतर्गत आता है, तो संबंधित परियोजना को नियमों के अनुसार prior Environmental Clearance की जरूरत हो सकती है। PIB के अनुसार, ऐसी Building Projects की समीक्षा में Freshwater Availability, Water Balance Report, Greywater Generation और उसके Recycling तथा Reuse जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर Data Centre को हर परिस्थिति में एक ही प्रकार की Environmental Clearance चाहिए, या किसी भी Data Centre पर पर्यावरणीय शर्तें लागू नहीं होतीं। परियोजना का आकार, स्वरूप, स्थान और लागू नियम तय करते हैं कि कौन-सी मंजूरी आवश्यक है।
स्रोत: PIB — Effective use of water in AI Data Centres, 6 अगस्त 2026
सरकार की नीतियाँ और निवेश को प्रोत्साहन
भारत सरकार Data Centre Infrastructure, Cloud Computing और AI Ecosystem के विकास के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार, Data Centres को 2022-23 के Union Budget में Harmonized List of Infrastructure में शामिल किया गया था। इससे संबंधित Infrastructure Projects के लिए वित्तपोषण तक पहुँच में सहायता मिल सकती है।
Union Budget 2026-27 में पात्र विदेशी Cloud Service Providers के लिए भारत में स्थित Data Centres का उपयोग करते हुए वैश्विक सेवाएँ देने की स्थिति में 2047 तक Tax Holiday का प्रस्ताव घोषित किया गया। यह सुविधा निर्धारित शर्तों और पात्रता के अधीन है; इसे हर Data Centre या हर घरेलू लेनदेन पर लागू सामान्य कर छूट नहीं समझना चाहिए।
सरकार की सितंबर 2026 की जानकारी में IndiaAI Mission, Semicon 2.0 और IT Hardware Manufacturing से संबंधित पहलों को भी डेटा सेंटर Ecosystem के साथ जोड़ा गया है। इन पहलों का उद्देश्य Computing Capacity, Hardware Supply Chain और घरेलू तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देना है।
निवेश को प्रोत्साहन देने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि परियोजनाओं के स्थान चयन, बिजली और पानी की योजना, पर्यावरणीय समीक्षा तथा स्थानीय समुदाय के साथ संवाद के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।
स्थानीय समुदाय के हितों की रक्षा कैसे की जा सकती है?
Data Centre Investment और स्थानीय जरूरतों को साथ लेकर चलने के लिए परियोजना के शुरुआती चरण से ही स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदारी तय करना उपयोगी हो सकता है। केवल निर्माण शुरू होने के बाद शिकायतों का जवाब देने के बजाय, प्रभावित लोगों को योजना और संभावित प्रभावों के बारे में समय रहते जानकारी मिलनी चाहिए।
1. सार्वजनिक परामर्श
जहाँ उपयुक्त हो, परियोजना के स्थान, निर्माण गतिविधियों और स्थानीय प्रभावों पर निवासियों, स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के साथ बातचीत की जाए।
2. जल और बिजली की पारदर्शी योजना
परियोजना की अनुमानित मांग, आपूर्ति स्रोत, Recycling व्यवस्था और अतिरिक्त Infrastructure की जरूरतों की जानकारी उचित स्तर पर उपलब्ध हो।
3. शोर और पर्यावरण की निगरानी
Noise Levels, पेड़ों और हरित क्षेत्रों पर प्रभाव, निर्माण के दौरान प्रदूषण और लागू पर्यावरणीय शर्तों के पालन की निगरानी की जाए।
4. शिकायत निवारण व्यवस्था
स्थानीय निवासियों को शिकायत दर्ज करने, जवाब पाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रशासनिक निकाय से संपर्क करने की स्पष्ट प्रक्रिया मिले।
5. स्थानीय आर्थिक लाभ
जहाँ संभव हो, स्थानीय भर्ती, कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के अवसर और समुदाय के लिए उपयुक्त सहयोग योजनाओं पर विचार किया जाए।
भारत के लिए निवेश और पर्यावरण के बीच संतुलन क्यों जरूरी है?
Data Centres डिजिटल अर्थव्यवस्था को चलाने वाला बुनियादी ढाँचा हैं। वे Cloud Services, AI Computing, Banking, E-Governance और कई अन्य ऑनलाइन सेवाओं को सपोर्ट करते हैं। इन परियोजनाओं से निर्माण, Engineering, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय Supply Chains में अवसर बन सकते हैं।
दूसरी ओर, बड़े Data Centres की ऊर्जा, पानी और भूमि संबंधी जरूरतें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रभाव पैदा कर सकती हैं। इसलिए निवेश की राशि या Computing Capacity को ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। ऊर्जा दक्षता, जल उपयोग, स्थानीय बुनियादी ढाँचे, रोजगार की गुणवत्ता और प्रभावित समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत के सामने चुनौती AI Infrastructure को बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने की है। बेहतर योजना, लागू नियमों का पालन, पारदर्शी जानकारी और स्थानीय शिकायतों का समाधान इस संतुलन में भूमिका निभा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
AI Data Centre क्या होता है?
AI Data Centre ऐसा Infrastructure है जिसमें Servers, Storage और Networking Systems के जरिए AI Models तथा अन्य डिजिटल सेवाओं की Computing जरूरतें पूरी की जाती हैं।
भारत में डेटा सेंटर क्षमता कितनी है?
PIB की 14 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत की स्थापित डेटा सेंटर बिजली क्षमता लगभग 1.57 GW थी। 2030 तक लगभग 8 GW क्षमता का अनुमान दिया गया है।
भारत में डेटा सेंटर निवेश बढ़ने का कारण क्या है?
AI, Cloud Computing, डिजिटल सेवाओं, Internet Traffic और डेटा स्टोरेज की बढ़ती जरूरत प्रमुख कारणों में शामिल हैं। सरकारी नीतियाँ और Infrastructure Investment भी इस विस्तार को समर्थन दे रहे हैं।
डेटा सेंटर से स्थानीय लोगों को क्या चिंता है?
कुछ परियोजनाओं के आसपास पानी और बिजली की मांग, पेड़ों की कटाई, शोर, भूमि उपयोग और स्थानीय लोगों से पर्याप्त परामर्श न होने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। हर परियोजना का प्रभाव उसके स्थान और तकनीकी व्यवस्था पर निर्भर करता है।
क्या हर Data Centre बहुत अधिक पानी इस्तेमाल करता है?
पानी की खपत Cooling Technology, मौसम, संचालन और पुनर्चक्रण की व्यवस्था पर निर्भर करती है। इसलिए किसी विशेष परियोजना की वास्तविक खपत जानने के लिए उसके Water Usage और Cooling System की जानकारी देखनी चाहिए।
क्या डेटा सेंटर बनने से घरेलू बिजली कटौती बढ़ेगी?
ऐसा हर परियोजना के लिए निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। प्रभाव स्थानीय Grid Capacity, Dedicated Power Supply, नए Infrastructure और बिजली वितरण की योजना पर निर्भर करेगा।
क्या AI Data Centres को Environmental Clearance की जरूरत होती है?
यह परियोजना के आकार, स्वरूप और लागू नियमों पर निर्भर करता है। कुछ Building and Construction Projects को निर्धारित सीमाएँ पार करने पर prior Environmental Clearance की जरूरत हो सकती है।
स्थानीय लोग किसी परियोजना की जानकारी कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं?
स्थानीय निकाय, संबंधित राज्य विभाग, बिजली वितरण कंपनी और पर्यावरणीय मंजूरी देने वाली सक्षम संस्था के रिकॉर्ड से परियोजना की मंजूरियों और लागू शर्तों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
भारत में AI Data Centre निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, Cloud Computing और आधुनिक Computing Infrastructure के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। सरकारी आंकड़े आने वाले वर्षों में क्षमता बढ़ने का संकेत देते हैं, जबकि Amazon, Google और Microsoft जैसी कंपनियों की योजनाएँ इस क्षेत्र में बड़े निवेश की दिशा दिखाती हैं।
लेकिन मुंबई और आंध्र प्रदेश की परियोजनाओं से जुड़े विवाद बताते हैं कि बड़े डिजिटल Infrastructure के प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी महसूस किए जा सकते हैं। पानी, बिजली, शोर, पेड़ों की कटाई और सार्वजनिक परामर्श जैसे सवालों की समीक्षा तथ्यों, परियोजना-विशिष्ट आंकड़ों और लागू नियमों के आधार पर होनी चाहिए।
भारत के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य केवल अधिक Data Centres बनाना नहीं, बल्कि ऐसी डिजिटल क्षमता विकसित करना है जो आर्थिक अवसर पैदा करे और स्थानीय संसाधनों तथा समुदायों के हितों को भी ध्यान में रखे।