लखनऊ स्वास्थ्य अपडेट
लखनऊ में पांच दिन में 87 नए डेंगू केस, कुल मरीजों की संख्या 342 पहुंची
बारिश और जलभराव के बाद डेंगू के मामलों में तेजी, स्वास्थ्य विभाग ने source reduction, anti-larva spraying और fogging बढ़ाई।
लखनऊ में डेंगू की ताजा स्थिति
5 दिनों में नए केस
87
इस साल कुल केस
342
नए केस की अवधि
29 Sep - 3 Oct
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डेंगू के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिली है। शहर में 29 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच सिर्फ पांच दिनों में डेंगू के 87 नए मामले सामने आए हैं। इन नए मामलों के सामने आने के बाद इस साल लखनऊ में रिपोर्ट किए गए डेंगू संक्रमणों की कुल संख्या बढ़कर 342 हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार हाल की बारिश के बाद डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। लगातार हुई बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी जमा हुआ, जिससे मच्छरों के प्रजनन के लिए नए स्थान बन गए। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक बारिश रुकने के बाद जमा हुआ पानी डेंगू फैलाने वाले Aedes aegypti मच्छर के लिए अनुकूल breeding sites उपलब्ध करा सकता है।
स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निकाय की टीमें प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा रही हैं। जिन इलाकों में डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं, वहां case-based vector-control activities पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पांच दिनों में 87 नए मामले कैसे बढ़े?
लखनऊ में 29 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच 87 नए डेंगू केस दर्ज हुए। यह बढ़ोतरी उस समय हुई जब शहर में लगातार बारिश के कारण कई जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई थी।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बारिश के बाद घरों और आसपास जमा पानी में मच्छरों के लिए नए breeding sites बन सकते हैं। कूलर, गमले, पुराने टायर, खाली कंटेनर, छतों पर रखे सामान और अन्य ऐसी जगहें जहां थोड़ी मात्रा में भी पानी जमा हो, Aedes mosquito के प्रजनन का कारण बन सकती हैं।
इस साल अब तक 342 डेंगू केस
नए 87 मामलों के साथ लखनऊ में इस साल डेंगू संक्रमितों की संख्या 342 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि इस साल बारिश के मौसम के बाद डेंगू संक्रमण पर विशेष निगरानी की आवश्यकता बढ़ गई है।
इससे पहले भी सितंबर के दौरान डेंगू के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई थी। 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 1 सितंबर से 26 सितंबर के बीच लखनऊ में 144 डेंगू केस सामने आए थे। अगस्त में भी 111 मामले दर्ज किए गए थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बढ़ोतरी?
सितंबर और अक्टूबर डेंगू के लिए संवेदनशील अवधि मानी जाती है। बारिश के बाद जमा पानी, गर्म तापमान और नमी मच्छरों के प्रजनन और transmission के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकते हैं।
बारिश और जलभराव से बढ़ा मच्छरों का खतरा
हाल में लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के कारण लखनऊ के कई इलाकों में जलभराव हुआ। बारिश के बाद जब पानी लंबे समय तक जमा रहता है तो वहां मच्छरों के breeding sites बनने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार Aedes aegypti मच्छर घरों और आसपास मौजूद छोटे-छोटे पानी के कंटेनरों में भी पनप सकता है। इसलिए केवल बड़े जलभराव वाले स्थानों को साफ करना पर्याप्त नहीं है। घरों के अंदर और आसपास मौजूद छोटे पानी के स्रोतों की नियमित जांच भी जरूरी है।
Aedes aegypti मच्छर कहां पनप सकता है?
डेंगू फैलाने वाला Aedes aegypti मच्छर साफ या अपेक्षाकृत साफ जमा पानी वाले छोटे कंटेनरों में भी breeding कर सकता है। घरों और आसपास ऐसी कई जगहें होती हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
घर के अंदर
- कूलर में जमा पानी
- फूलों के गमले
- पानी रखने वाले कंटेनर
- बाल्टी और खुले बर्तन
- छत पर रखे सामान
घर के बाहर
- पुराने टायर
- खाली डिब्बे
- निर्माण स्थल
- खुले कंटेनर
- जलभराव वाले छोटे गड्ढे
110 वार्डों में निगरानी की चुनौती
लखनऊ शहर में कुल 110 वार्ड हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूरे शहर में vector-control activities की निगरानी के लिए पांच malaria inspectors और उनकी dedicated teams काम कर रही हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चुनौती यह है कि डेंगू के मामले किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। जिस इलाके में नया केस मिलता है, वहां तत्काल source reduction और mosquito-control activities शुरू करना जरूरी होता है।
जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार बारिश के बाद case-based activities पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिन स्थानों से डेंगू के मामले सामने आते हैं, वहां टीमें भेजकर आसपास के संभावित breeding sites की जांच और सफाई कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रोकथाम रणनीति
डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निकाय द्वारा कई स्तरों पर vector-control activities की जा रही हैं।
- Source Reduction: मच्छरों के breeding sites को खत्म करना।
- Anti-Larva Spraying: संभावित breeding locations पर larva control करना।
- Fogging: प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में मच्छरों की संख्या कम करने के लिए fogging करना।
- Case-Based Surveillance: जहां डेंगू केस मिलता है, वहां आसपास विशेष निगरानी करना।
- Public Awareness: लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक करना।
बारिश के बाद का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
बारिश रुकने के बाद जमा पानी डेंगू नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण चिंता बन जाता है। लगातार बारिश के दौरान कई जगहों पर जमा पानी बह सकता है, लेकिन बारिश रुकने के बाद छोटे कंटेनरों और गड्ढों में पानी ठहर सकता है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग बारिश के बाद vulnerable locations पर source reduction और anti-larva activities को तेज कर रहा है। यदि इन breeding sites को समय पर खत्म नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है।
अक्टूबर में डेंगू का खतरा क्यों अधिक रहता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू के मामले आमतौर पर मानसून के बाद बढ़ते हैं और सितंबर तथा अक्टूबर के आसपास संक्रमण का दबाव अधिक देखा जा सकता है। बारिश के बाद गर्म तापमान और humidity मच्छरों के survival और biting activity के लिए अनुकूल हो सकते हैं।
जैसे-जैसे दिन और रात के तापमान में बदलाव बढ़ता है और मौसम अपेक्षाकृत ठंडा होता है, डेंगू के मामलों में कमी आने की संभावना रहती है। हालांकि, जब तक मच्छरों के breeding sites मौजूद हैं, संक्रमण का खतरा बना रह सकता है।
लोगों को किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?
डेंगू की आशंका वाले मौसम में लगातार बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, मतली या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए जहां हाल में डेंगू के मामले सामने आए हैं या जहां बारिश के बाद पानी जमा हुआ है।
घर पर डेंगू से बचाव के आसान तरीके
- कूलर का पानी नियमित रूप से खाली और साफ करें।
- फूलों के गमलों और ट्रे में पानी जमा न होने दें।
- पुराने टायर और खाली कंटेनर खुले में न रखें।
- पानी की टंकियों और कंटेनरों को ढककर रखें।
- छत और घर के आसपास पानी जमा होने की जगहों की नियमित जांच करें।
- जरूरत के अनुसार mosquito nets और repellents का इस्तेमाल करें।
- बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह लें और खुद से दवा लेने से बचें।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सहयोग की अपील की
अधिकारियों का कहना है कि डेंगू नियंत्रण केवल fogging या सरकारी टीमों की कार्रवाई से संभव नहीं है। घरों और आसपास मौजूद breeding sites को खत्म करने में नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घर, छत, कूलर, गमले और आसपास के स्थानों में पानी जमा न होने दें। पुराने टायर, डिब्बे और अन्य बेकार सामान जिनमें पानी जमा हो सकता है, उन्हें उचित तरीके से हटाना चाहिए।
लखनऊ में डेंगू को लेकर अभी क्या स्थिति है?
29 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच 87 नए मामले सामने आने के बाद इस साल कुल डेंगू संक्रमण 342 तक पहुंच गया है। हालिया वृद्धि के पीछे बारिश और जलभराव से बने संभावित mosquito breeding sites को प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में surveillance और vector-control activities बढ़ा दी हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिन क्षेत्रों से मामले सामने आ रहे हैं वहां source reduction, anti-larva spraying और fogging पर ध्यान दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
लखनऊ में डेंगू के मामलों में हालिया तेजी ने बारिश के बाद mosquito-control की चुनौती बढ़ा दी है। 29 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच 87 नए केस मिलने के बाद इस साल कुल मामले 342 तक पहुंच गए हैं। जलभराव और घरों के आसपास जमा पानी Aedes aegypti मच्छर के breeding sites बना सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा source reduction, anti-larva spraying और fogging के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। अक्टूबर के दौरान विशेष सतर्कता रखते हुए पानी जमा होने से रोकना और बुखार के लक्षणों को नजरअंदाज न करना जरूरी है।