अमेरिकी PERM Green Card प्रक्रिया पर रोक 2026: भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या असर होगा?
अमेरिका में काम करने वाले भारतीय IT professionals के लिए 8 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण immigration update सामने आया। अमेरिकी Department of Labor (DOL) ने आठ प्रमुख technology कंपनियों से जुड़ी Permanent Labor Certification (PERM) applications की नई filing और लंबित आवेदनों की processing रोकने की कार्रवाई की। प्रभावित कंपनियों में TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe शामिल हैं। यह कदम कथित compliance violations और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े आरोपों की जाँच के बीच उठाया गया। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई से मौजूदा H-1B visas अपने आप अमान्य नहीं होते, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों के employment-based Green Card आवेदन की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
PERM Suspension 2026: मुख्य जानकारी
| घोषणा | 8 अक्टूबर 2026 की अमेरिकी कार्रवाई |
|---|---|
| संबंधित विभाग | U.S. Department of Labor (DOL) |
| प्रभावित कंपनियाँ | TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe |
| रोक का दायरा | संबंधित कंपनियों से जुड़ी नई PERM applications और pending applications की processing |
| सरकार द्वारा बताए गए कारण | विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और PERM प्रक्रिया में कथित नियम उल्लंघनों की जाँच |
| H-1B visa पर असर | PERM रोक से मौजूदा H-1B visa अपने आप रद्द नहीं होता |
| मुख्य जोखिम | प्रभावित कर्मचारियों के Green Card process में देरी और भविष्य की immigration planning में अनिश्चितता |
| स्थिति की तारीख | 10 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी |
महत्वपूर्ण: यह रोक सभी भारतीय नागरिकों, सभी अमेरिकी employers या पूरे H-1B visa programme पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है। इसका दायरा संबंधित कंपनियों की PERM प्रक्रिया से जुड़ा है।
PERM Green Card प्रक्रिया क्या है?
PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है। यह अमेरिकी Department of Labor की employment-based immigration प्रक्रिया है, जिसके तहत employer को आम तौर पर यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी workers के हितों की रक्षा करते हुए भर्ती की निर्धारित प्रक्रिया पूरी की गई है। यह प्रक्रिया कुछ employment-based Green Card categories के लिए महत्वपूर्ण चरण होती है।
जब कोई अमेरिकी employer किसी योग्य विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी के आधार पर sponsor करना चाहता है, तो लागू श्रेणी और परिस्थितियों के अनुसार PERM labor certification की आवश्यकता हो सकती है। PERM मंजूर होने के बाद आम तौर पर employer अगला चरण, यानी Form I-140 Immigrant Petition, आगे बढ़ाता है। उसके बाद कर्मचारी की priority date, visa availability और अन्य पात्रता शर्तों के अनुसार आगे की प्रक्रिया होती है।
Employment-based Green Card के सामान्य चरण
- Employer द्वारा संबंधित स्थायी नौकरी और sponsorship की तैयारी।
- जहाँ आवश्यक हो, prevailing wage determination और भर्ती प्रक्रिया।
- Department of Labor के पास PERM labor certification application।
- PERM मंजूर होने पर पात्र employer द्वारा Form I-140 दाखिल करना।
- Visa availability और व्यक्तिगत पात्रता के अनुसार adjustment of status या consular processing।
हर Green Card category में PERM अनिवार्य नहीं होता। कुछ श्रेणियों में अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए इस कार्रवाई को सभी employment-based immigration routes पर पूर्ण रोक के रूप में समझना सही नहीं होगा।
अमेरिका ने किन कंपनियों की PERM प्रक्रिया रोकी?
8 और 9 अक्टूबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने आठ प्रमुख technology और IT services कंपनियों से संबंधित PERM applications पर कार्रवाई की। इनमें भारतीय IT services कंपनियाँ, एक फ्रांसीसी IT services company और अमेरिकी technology कंपनियाँ शामिल हैं।
| कंपनी | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|
| Tata Consultancy Services (TCS) | IT services और consulting |
| Infosys | IT services और digital consulting |
| Wipro | IT services और technology consulting |
| HCLTech | IT services और engineering |
| Cognizant | IT services और consulting |
| Capgemini | Technology और consulting |
| Microsoft | Software और cloud technology |
| Adobe | Software और digital products |
रिपोर्टों के अनुसार, रोक नई applications को स्वीकार करने और pending applications की processing दोनों पर लागू की गई। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी कर्मचारी अपनी नौकरी या मौजूदा visa status तुरंत खो देते हैं। किसी कर्मचारी पर वास्तविक प्रभाव उसके employer, PERM case की स्थिति, visa category और व्यक्तिगत immigration record पर निर्भर करेगा।
PERM प्रक्रिया पर रोक क्यों लगाई गई?
अमेरिकी प्रशासन ने कार्रवाई को employment-based immigration programme में कथित misuse और compliance violations की जाँच से जोड़ा है। अधिकारियों का आरोप है कि कुछ employers की भर्ती प्रक्रिया में अमेरिकी workers को उचित अवसर नहीं दिया गया या विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों का पालन नहीं हुआ।
PERM प्रक्रिया में employer को सामान्यतः निर्धारित recruitment requirements का पालन करना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नौकरी के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी workers के हितों की अनदेखी न हो तथा विदेशी कर्मचारी को लागू नियमों के अनुसार sponsor किया जाए।
हालाँकि, प्रशासन द्वारा लगाए गए आरोप अपने आप में सभी संबंधित कंपनियों या उनके कर्मचारियों के दोषी होने का प्रमाण नहीं हैं। प्रत्येक मामले में जाँच, दस्तावेज और लागू कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। प्रभावित कंपनियों की प्रतिक्रियाओं में नियमों के अनुपालन और अमेरिकी workforce के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है।
इसलिए समाचार को समझते समय सरकारी आरोपों, कंपनियों के जवाब और अंतिम कानूनी निष्कर्षों को अलग-अलग देखना चाहिए।
क्या H-1B visa भी बंद हो गया है?
नहीं। भारत के विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि PERM applications पर रोक और H-1B visa programme अलग व्यवस्थाएँ हैं। इस रोक से मौजूदा H-1B visa की वैधता या visa holders और उनके dependents का कानूनी दर्जा अपने आप प्रभावित नहीं होता।
H-1B एक temporary employment visa category है, जबकि PERM कुछ employment-based Green Card applications के लिए labor certification का चरण है। कोई कर्मचारी H-1B status पर काम कर सकता है और अलग से permanent residency की प्रक्रिया में भी हो सकता है। लेकिन एक प्रक्रिया में रुकावट आने से दूसरी प्रक्रिया की शर्तें अपने आप बदल नहीं जातीं।
| मुद्दा | PERM रोक का संभावित प्रभाव |
|---|---|
| मौजूदा H-1B visa | केवल PERM रोक से अपने आप रद्द नहीं होता |
| कर्मचारी की वर्तमान नौकरी | अपने आप समाप्त नहीं होती; employment status अलग विषय है |
| Pending PERM application | प्रभावित employer से जुड़ा आवेदन processing में रुक सकता है |
| नई PERM application | प्रभावित कंपनियों से जुड़ी नई filing रोकी गई है |
| Green Card की अगली प्रक्रिया | PERM पर निर्भर मामलों में देरी या planning की अनिश्चितता संभव |
यदि किसी कर्मचारी का H-1B visa या status समाप्त होने के करीब है, तो उसे केवल समाचार के आधार पर अपनी स्थिति का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। H-1B extension और Green Card से जुड़े नियम अलग-अलग हैं और व्यक्तिगत मामले में विशेषज्ञ सलाह जरूरी हो सकती है।
भारत के विदेश मंत्रालय के बयान पर आधारित आधिकारिक समाचार रिपोर्ट
भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या असर हो सकता है?
इस कार्रवाई का सबसे सीधा प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनकी Green Card sponsorship प्रभावित कंपनियों के माध्यम से चल रही थी या शुरू होने वाली थी। प्रभाव हर कर्मचारी के लिए समान नहीं होगा। जिनका PERM आवेदन pending है, जिनकी प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है या जो आगे के immigration चरणों पर निर्भर हैं, उनकी स्थिति अलग हो सकती है।
1. Green Card प्रक्रिया में देरी
यदि employer की PERM application पर processing रोक दी गई है, तो कर्मचारी के employment-based Green Card का अगला चरण भी देर से शुरू हो सकता है। PERM आवश्यक होने वाले मामलों में इस देरी से I-140 filing और आगे की planning प्रभावित हो सकती है।
2. H-1B की समय-सीमा को लेकर चिंता
कुछ H-1B workers के लिए permanent residency process और visa extension planning आपस में जुड़ी हो सकती हैं। यदि Green Card प्रक्रिया रुकती है, तो जिन कर्मचारियों की H-1B अवधि समाप्त होने के करीब है, उन्हें अधिक सावधानी से अपनी स्थिति की समीक्षा करनी पड़ सकती है। हालांकि, H-1B extension के नियम अलग हैं और हर मामले में एक जैसा परिणाम नहीं होगा।
3. परिवार की लंबी अवधि की योजना
Green Card की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों की housing, बच्चों की शिक्षा, दीर्घकालीन रोजगार और देश में रहने की योजना प्रभावित हो सकती है। लेकिन PERM रोक से dependents का मौजूदा कानूनी दर्जा अपने आप समाप्त नहीं होता। हर family member की स्थिति उसके visa या immigration category के अनुसार देखी जानी चाहिए।
4. नौकरी बदलने और career planning में सावधानी
कर्मचारी यदि employer बदलने, देश से बाहर यात्रा करने या नई immigration filing करने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्हें अपने वर्तमान status, pending petitions और संबंधित deadlines की समीक्षा करनी चाहिए। PERM की स्थिति और H-1B की वैधता अलग-अलग मुद्दे हैं।
क्या भारतीय IT कंपनियों के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा?
कर्मचारियों पर असर और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर असर एक ही बात नहीं हैं। Reuters और अन्य मीडिया रिपोर्टों में analysts ने कहा कि निकट अवधि में भारतीय IT कंपनियों पर प्रत्यक्ष वित्तीय प्रभाव सीमित रह सकता है, क्योंकि कंपनियों ने अमेरिकी स्थानीय hiring और offshore delivery models का उपयोग बढ़ाया है।
Indian Express और अन्य रिपोर्टों में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में छह प्रमुख भारतीय IT services कंपनियों से जुड़ी PERM requests की संख्या कुल 117,849 requests में 1,400 से कम थी। यह आंकड़ा इन कंपनियों के लिए PERM route के अपेक्षाकृत सीमित उपयोग का संकेत देता है, लेकिन इससे हर प्रभावित कर्मचारी की व्यक्तिगत समस्या छोटी साबित नहीं होती।
TCS ने रिपोर्टों में कहा कि इस कार्रवाई से उसकी workforce strategy या client engagements पर material impact की उम्मीद नहीं है। कंपनियों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग हो सकती हैं और आगे की स्थिति जाँच, regulatory decisions और कर्मचारियों की वास्तविक संख्या पर निर्भर करेगी।
इसलिए एक ओर प्रभावित कर्मचारियों को Green Card प्रक्रिया में गंभीर व्यक्तिगत देरी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि दूसरी ओर कंपनियों का कुल राजस्व या दैनिक client operations तुरंत उसी अनुपात में प्रभावित होना जरूरी नहीं है।
भारतीय IT कंपनियाँ अमेरिकी hiring रणनीति कैसे बदल सकती हैं?
अमेरिका में immigration rules को लेकर अनिश्चितता के बीच भारतीय IT कंपनियाँ पहले से स्थानीय hiring, remote delivery और offshore development centres का उपयोग कर रही हैं। PERM रोक के बाद भी कंपनियाँ अपनी staffing strategy में बदलाव पर विचार कर सकती हैं, लेकिन यह हर कंपनी के लिए अलग होगा।
- Local hiring: अमेरिका में उपलब्ध योग्य professionals को भर्ती करने पर जोर बढ़ सकता है।
- Offshore delivery: भारत और अन्य देशों से remote technology services देने वाले models की भूमिका बनी रह सकती है।
- Workforce planning: कंपनियाँ visa, sponsorship और employee mobility से जुड़े जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन कर सकती हैं।
- Client contracts: कुछ contracts में staffing location और delivery commitments की शर्तों पर दोबारा चर्चा हो सकती है।
- Compliance: Recruitment records और labour certification procedures की समीक्षा अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
ये संभावित व्यावसायिक प्रतिक्रियाएँ हैं, सभी कंपनियों द्वारा घोषित निर्णय नहीं। वास्तविक बदलाव कंपनी के आकार, ग्राहक, कर्मचारियों और regulatory स्थिति पर निर्भर करेंगे।
PERM आवेदन प्रभावित हो तो कर्मचारी क्या करें?
यदि कोई कर्मचारी सूचीबद्ध कंपनियों में काम करता है और उसकी Green Card sponsorship चल रही है, तो उसे सबसे पहले अपने case की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। सामान्य समाचार रिपोर्ट से यह तय नहीं होता कि उसका व्यक्तिगत आवेदन किस चरण में है या उसके लिए कौन-सा विकल्प उपलब्ध है।
- Employer की immigration team से संपर्क करें: पता करें कि आपका PERM आवेदन दाखिल हुआ है, pending है या अभी शुरू होना था।
- लिखित case update माँगें: अपने PERM case number, filing date और वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड रखें।
- H-1B expiry date जाँचें: अपने I-797 approval notice, I-94 record और employer की immigration guidance से स्थिति सत्यापित करें।
- अगले चरणों की समीक्षा करें: यदि PERM आवश्यक है, तो I-140 या आगे की filing की समय-सीमा पर असर के बारे में पूछें।
- Qualified immigration attorney से सलाह लें: खासकर तब जब H-1B अवधि समाप्त होने के करीब हो, नौकरी बदलनी हो या travel की योजना हो।
- अपुष्ट दावों से बचें: सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह न मानें कि visa रद्द हो गया है या कर्मचारी को तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा।
यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। Immigration rules और किसी कर्मचारी की eligibility उसके case-specific facts पर निर्भर करती है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?
भारत के विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2026 को कहा कि PERM programme पर अमेरिकी कार्रवाई मौजूदा H-1B visas की validity या उनके holders और dependents के कानूनी दर्जे को अपने आप प्रभावित नहीं करती। मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रभावित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों की permanent residency प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
विदेश मंत्रालय ने भारतीय professionals के योगदान पर जोर देते हुए कहा कि skilled talent की mobility से भारत और अमेरिका दोनों को लाभ मिलता है। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि हाल की अमेरिकी कार्रवाइयाँ दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं और सहयोग को आगे बढ़ाने में मददगार नहीं हैं।
इस प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश यह है कि temporary work visa और permanent residency की प्रक्रिया को अलग-अलग समझा जाना चाहिए। सरकार इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, जबकि प्रभावित कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत immigration guidance महत्वपूर्ण बनी हुई है।
आधिकारिक जानकारी कहाँ मिलेगी?
U.S. Department of Labor
PERM labour certification और Foreign Labor Certification programme की आधिकारिक जानकारी तथा processing updates के लिए विभाग की वेबसाइट देखें।
DOL Foreign Labor CertificationU.S. Citizenship and Immigration Services (USCIS)
Green Card categories, Form I-140 और adjustment of status संबंधी आधिकारिक जानकारी यहाँ मिलती है।
USCIS Green Card Informationभारत का विदेश मंत्रालय
भारतीय नागरिकों और H-1B holders पर असर से संबंधित भारत सरकार की प्रतिक्रिया के लिए आधिकारिक मंत्रालय की वेबसाइट देखें।
Ministry of External Affairsसमाचार रिपोर्ट और कंपनी की प्रतिक्रिया
प्रभावित कंपनियों, suspension और संभावित कारोबारी असर की रिपोर्ट पढ़ें। समाचार को व्यक्तिगत कानूनी सलाह का विकल्प न मानें।
Indian Express: PERM suspension का प्रभावअक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या अमेरिका ने सभी भारतीयों की Green Card प्रक्रिया रोक दी है?
नहीं। 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई आठ प्रमुख technology कंपनियों से जुड़ी PERM applications पर केंद्रित है। इसे सभी भारतीय नागरिकों या सभी employers पर लागू पूर्ण प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए।
क्या TCS, Infosys और Wipro के सभी कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी?
नहीं। PERM processing पर रोक अपने आप नौकरी समाप्त नहीं करती। रोजगार और visa status अलग-अलग विषय हैं और कर्मचारी की वास्तविक स्थिति उसके employer और immigration record पर निर्भर करती है।
क्या मौजूदा H-1B visa रद्द हो जाएगा?
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, PERM applications पर रोक से मौजूदा H-1B visa की validity अपने आप प्रभावित नहीं होती। फिर भी visa और immigration status की व्यक्तिगत शर्तें अलग से जाँचनी चाहिए।
PERM application pending है तो क्या होगा?
प्रभावित कंपनियों से जुड़ी pending applications की processing रोकने की रिपोर्ट है। कर्मचारी को employer की immigration team से अपने case की स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में लिखित जानकारी लेनी चाहिए।
क्या Green Card का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है?
यह कार्रवाई संबंधित कंपनियों की PERM प्रक्रिया पर केंद्रित है। सभी employment-based Green Card categories पर एक समान रोक होने की पुष्टि नहीं है। वैकल्पिक रास्तों की पात्रता व्यक्तिगत परिस्थितियों और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
क्या H-1B visa खत्म होने के करीब होने पर अधिक चिंता करनी चाहिए?
ऐसी स्थिति में अपने case की जल्द समीक्षा करना उपयोगी है, क्योंकि PERM में देरी कुछ कर्मचारियों की लंबी अवधि की immigration planning को प्रभावित कर सकती है। H-1B extension के नियम अलग हैं; व्यक्तिगत सलाह के लिए qualified immigration attorney से संपर्क करें।
क्या अमेरिकी सरकार ने सभी कंपनियों को नियम उल्लंघन का दोषी साबित कर दिया है?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में कार्रवाई को कथित उल्लंघनों की जाँच से जोड़ा गया है। आरोपों को अंतिम कानूनी निष्कर्ष या सभी कर्मचारियों के दोष का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
भारतीय IT कंपनियों पर इसका कितना वित्तीय असर होगा?
विश्लेषकों की रिपोर्टों के अनुसार निकट अवधि में कंपनियों पर प्रत्यक्ष असर सीमित रह सकता है, लेकिन कर्मचारियों की Green Card प्रक्रिया में व्यक्तिगत देरी गंभीर हो सकती है। वास्तविक कारोबारी प्रभाव कंपनी की staffing strategy और आगे के regulatory developments पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
अमेरिका की PERM Green Card प्रक्रिया पर 8 अक्टूबर 2026 की कार्रवाई ने भारतीय IT professionals के बीच चिंता बढ़ाई है। TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe से जुड़ी नई तथा pending PERM applications की processing रोकने की रिपोर्ट है। यह कदम कथित नियम उल्लंघनों की जाँच से जुड़ा है, लेकिन आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई से मौजूदा H-1B visas अपने आप अमान्य नहीं होते। हालांकि, जिन कर्मचारियों का employment-based Green Card process PERM पर निर्भर है, उन्हें देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
प्रभावित कर्मचारियों को अपने employer की immigration team से case-specific update लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर qualified immigration attorney से सलाह लेनी चाहिए। आगे की स्थिति अमेरिकी Department of Labor, USCIS और भारत के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक सूचनाओं से स्पष्ट होगी।