New Labour Code 2026: कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए नई जानकारी
भारत सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर चार Labour Codes बनाए हैं। ये चारों कोड 21 नवंबर 2025 से प्रभावी किए गए थे। वर्ष 2026 में कर्मचारी और नियोक्ता वेतन संरचना, न्यूनतम वेतन, PF, ग्रेच्युटी, काम की शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों को समझना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण: चार नए Labour Codes वर्ष 2026 में पहली बार लागू नहीं हुए हैं। इन्हें पहले बनाया गया था और 21 नवंबर 2025 से प्रभावी किया गया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इनके प्रावधानों को समझाने के लिए FAQs भी जारी किए हैं।
New Labour Code 2026: मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| देश | भारत |
| नए Labour Codes | 4 |
| एकीकृत पुराने केंद्रीय श्रम कानून | 29 |
| प्रभावी होने की तारीख | 21 नवंबर 2025 |
| जानकारी का वर्ष | 2026 |
| संबंधित मंत्रालय | श्रम एवं रोजगार मंत्रालय |
| आधिकारिक वेबसाइट | labour.gov.in |
भारत के चार नए Labour Codes कौन-कौन से हैं?
चार Labour Codes अलग-अलग केंद्रीय श्रम कानूनों को एक व्यवस्थित कानूनी ढाँचे में शामिल करते हैं। प्रत्येक कोड में रोजगार और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग विषय शामिल हैं।
1. Code on Wages, 2019 – वेतन संहिता
यह कोड वेतन, न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, बोनस और समान पारिश्रमिक से जुड़े प्रावधानों को शामिल करता है।
- न्यूनतम वेतन के लिए वैधानिक प्रावधान।
- कोड के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान।
- लिंग के आधार पर वेतन संबंधी भेदभाव रोकने के प्रावधान।
- संबंधित वैधानिक गणनाओं के लिए वेतन की समान परिभाषा।
2. Industrial Relations Code, 2020 – औद्योगिक संबंध संहिता
इस कोड में औद्योगिक संबंध, ट्रेड यूनियन, स्थायी आदेश और नियोक्ता-कर्मचारी विवादों के समाधान से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
- ट्रेड यूनियन के पंजीकरण और मान्यता से जुड़े नियम।
- औद्योगिक विवादों के समाधान की व्यवस्था।
- हड़ताल, तालाबंदी और छंटनी से जुड़े प्रावधान।
- लागू छंटनी के मामलों में कर्मचारियों के पुनः कौशल विकास के लिए प्रावधान।
3. Code on Social Security, 2020 – सामाजिक सुरक्षा संहिता
इस कोड में सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि, बीमा, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ और अन्य कर्मचारी कल्याण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
- पात्र संगठित और असंगठित कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढाँचा।
- गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए मान्यता।
- EPFO और ESIC से संबंधित प्रावधान।
- ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ और कर्मचारी कल्याण से जुड़े प्रावधान।
4. Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020
यह कोड संबंधित प्रतिष्ठानों में कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कर्मचारी कल्याण और काम की परिस्थितियों से जुड़े नियमों को शामिल करता है।
- कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रावधान।
- काम की परिस्थितियों और कल्याण सुविधाओं से जुड़े नियम।
- कोड के अनुसार कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने का प्रावधान।
- निर्धारित श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जाँच के प्रावधान।
- कॉन्ट्रैक्ट लेबर और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित नियम।
New Labour Code Salary Rules 2026: 50% वेतन नियम क्या है?
नए Labour Codes में महत्वपूर्ण बदलावों में से एक वेतन की समान परिभाषा है। इसमें बेसिक पे, महंगाई भत्ता (DA) और यदि लागू हो तो रिटेनिंग अलाउंस शामिल होते हैं। कुछ अन्य भत्तों और घटकों पर वैधानिक 50% गणना का नियम लागू होता है।
50% Wage Rule कैसे काम करता है?
यदि निर्धारित अपवर्जित भत्ते और अन्य घटक कुल पारिश्रमिक के 50% से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को Code on Wages की संबंधित वैधानिक गणना के लिए वेतन में वापस जोड़ा जाता है।
महत्वपूर्ण: इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी की बेसिक सैलरी CTC की ठीक 50% होना अनिवार्य है। गणना के लिए वेतन की कानूनी परिभाषा और लागू घटकों को देखना जरूरी है।
50% वेतन नियम का उदाहरण
नीचे दिया गया उदाहरण केवल 50% गणना को समझाने के लिए है। यह कोई आधिकारिक सैलरी स्ट्रक्चर या व्यक्तिगत वेतन निर्धारण नहीं है।
| सैलरी का घटक | उदाहरण राशि |
|---|---|
| बेसिक पे | ₹20,000 |
| महंगाई भत्ता (DA) | ₹5,000 |
| अन्य भत्ते | ₹25,000 |
| कुल उदाहरण पारिश्रमिक | ₹50,000 |
| कुल पारिश्रमिक का 50% | ₹25,000 |
| बेसिक पे + DA | ₹25,000 |
इस उदाहरण में बेसिक पे और DA का कुल योग पारिश्रमिक का 50% है। वास्तविक गणना में वेतन की वैधानिक परिभाषा, बाहर रखे गए घटक, नियोक्ता का योगदान और लागू नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
क्या नए Labour Code से PF बढ़ेगा?
वेतन की समान परिभाषा का प्रभाव कुछ वैधानिक लाभों की गणना पर पड़ सकता है। इसमें संबंधित प्रावधान लागू होने पर Provident Fund योगदान भी शामिल हो सकता है। हालांकि, वास्तविक PF राशि कर्मचारी के वेतन घटकों, लागू EPF प्रावधानों, योगदान सीमा और कर्मचारी तथा प्रतिष्ठान की स्थिति पर निर्भर करती है।
- सिर्फ Labour Codes प्रभावी होने से प्रत्येक कर्मचारी का PF किसी निश्चित प्रतिशत से अपने आप नहीं बढ़ जाता।
- नियोक्ता को लागू EPF नियमों और वेतन की परिभाषा के अनुसार योगदान की गणना करनी होती है।
- कर्मचारी अपनी सैलरी स्लिप और PF पासबुक देखकर वास्तविक योगदान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- व्यक्तिगत PF खाते की जानकारी के लिए आधिकारिक EPFO पोर्टल का उपयोग करें।
EPFO की आधिकारिक वेबसाइट देखें
New Gratuity Rules 2026: ग्रेच्युटी के नए नियम
Code on Social Security, 2020 में ग्रेच्युटी से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। पात्रता और गणना कर्मचारी की रोजगार श्रेणी, सेवा अवधि और लागू वैधानिक शर्तों पर निर्भर करती है।
- ग्रेच्युटी के प्रावधान कोड में निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होते हैं।
- Fixed-Term Employees के लिए विशेष ग्रेच्युटी प्रावधान हैं, जिनमें वैधानिक शर्तों के अनुसार आनुपातिक आधार शामिल है।
- सामान्य पाँच वर्ष की निरंतर सेवा की शर्त में मृत्यु या दिव्यांगता सहित कुछ वैधानिक अपवाद हैं।
- सभी स्थायी कर्मचारियों को एक वर्ष बाद अपने आप ग्रेच्युटी मिलने का दावा सही नहीं है। रोजगार की श्रेणी और संबंधित कानूनी प्रावधान देखना जरूरी है।
एक साल की ग्रेच्युटी को लेकर जरूरी स्पष्टीकरण
एक वर्ष की ग्रेच्युटी का प्रावधान निर्धारित शर्तों के अंतर्गत पात्र Fixed-Term Employment के लिए लागू होता है। इसे सभी स्थायी कर्मचारियों के लिए एक वर्ष बाद ग्रेच्युटी मिलने का सामान्य नियम नहीं समझना चाहिए।
न्यूनतम वेतन और समय पर सैलरी भुगतान
Code on Wages के अंतर्गत न्यूनतम वेतन और समय पर वेतन भुगतान के लिए वैधानिक ढाँचा दिया गया है। केंद्र सरकार Floor Wage निर्धारित कर सकती है, जबकि संबंधित सरकार इस कोड के अनुसार न्यूनतम वेतन दरें निर्धारित करती है।
- कोड के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को लागू प्रावधानों के अनुसार वेतन सुरक्षा मिलती है।
- न्यूनतम वेतन की दर संबंधित केंद्र या राज्य सरकार, कौशल श्रेणी, भौगोलिक क्षेत्र और निर्धारित कारकों के अनुसार अलग हो सकती है।
- नियोक्ताओं को वेतन भुगतान और कटौती से जुड़े लागू नियमों का पालन करना होता है।
- कर्मचारियों को अपने राज्य या संबंधित केंद्रीय सरकार की न्यूनतम वेतन अधिसूचना देखनी चाहिए।
महिला कर्मचारियों के लिए नए Labour Code के प्रावधान
Labour Codes में समान अवसर, कार्यस्थल सुरक्षा और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
- महिलाएँ लागू प्रावधानों के अंतर्गत सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों और कार्यों में काम कर सकती हैं।
- महिलाएँ अपनी सहमति और निर्धारित सुरक्षा शर्तों के अधीन नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं।
- वेतन और रोजगार की शर्तों में लिंग आधारित भेदभाव रोकने के प्रावधान शामिल हैं।
- मातृत्व लाभ और कार्यस्थल कल्याण से संबंधित लागू वैधानिक प्रावधान प्रभावी रहते हैं।
Gig Workers और असंगठित कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा
Code on Social Security में Gig Workers और Platform Workers को मान्यता दी गई है तथा पात्र श्रेणियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का ढाँचा उपलब्ध कराया गया है। इसमें असंगठित कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान शामिल हैं।
- Gig Workers और Platform Workers को वैधानिक ढाँचे में मान्यता।
- सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं से संबंधित प्रावधान।
- निर्धारित श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए Social Security Fund का प्रावधान।
- पात्र असंगठित कर्मचारियों तक सामाजिक सुरक्षा पहुँचाने के उपाय।
असंगठित कर्मचारियों के पंजीकरण और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी के लिए आधिकारिक e-Shram पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।
e-Shram आधिकारिक पोर्टल खोलेंAppointment Letter और Annual Health Check-up
Occupational Safety, Health and Working Conditions Code में नियुक्ति पत्र और कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। वास्तविक जिम्मेदारियाँ संबंधित प्रतिष्ठान, कोड के अंतर्गत आने वाली कर्मचारी श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करती हैं।
- कोड के अनुसार कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने का प्रावधान।
- निर्धारित श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जाँच के प्रावधान।
- नियोक्ताओं को लागू व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है।
- कर्मचारियों को अपने प्रतिष्ठान पर लागू नियमों और आधिकारिक अधिसूचनाओं की जानकारी लेनी चाहिए।
क्या नए Labour Codes सभी राज्यों में पूरी तरह लागू हैं?
भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में श्रम विषय शामिल है। Labour Codes के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को नियम बनाने का अधिकार है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण अवधि में पुराने नियम तब तक लागू रहेंगे, जब तक वे नए कोड के अनुरूप हैं और संबंधित कोड के अंतर्गत अंतिम नियम अधिसूचित नहीं हो जाते।
इसलिए कर्मचारियों और नियोक्ताओं को अपने प्रतिष्ठान पर लागू केंद्र और राज्य सरकार की नवीनतम अधिसूचनाएँ देखनी चाहिए। Labour Codes की प्रभावी तारीख और विस्तृत नियमों की अधिसूचना दो संबंधित लेकिन अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
2026 का अपडेट
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 16 मार्च 2026 की तारीख वाले अतिरिक्त FAQs जारी किए हैं। इनमें वेतन की गणना और अन्य प्रावधानों से जुड़े प्रश्नों को स्पष्ट किया गया है। राज्य-विशेष नियमों और अनुपालन के लिए संबंधित राज्य के श्रम विभाग की अधिसूचनाएँ देखें।
कर्मचारियों को अपनी Salary Slip में क्या जाँचना चाहिए?
- बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का विवरण।
- अन्य भत्ते और कटौतियाँ।
- जहाँ लागू हो, कर्मचारी और नियोक्ता का PF योगदान।
- जहाँ लागू हो, ESI कटौती और कवरेज।
- Gross Salary, Net Salary और वैधानिक कटौतियाँ।
- नियोक्ता द्वारा नियुक्ति पत्र जारी किया गया है या नहीं और रोजगार की लागू शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं।
Labour Complaint कहाँ करें?
यदि किसी कर्मचारी को वेतन न मिलने, बिना अनुमति कटौती, ओवरटाइम का भुगतान न होने, अवैध नौकरी समाप्ति या अन्य रोजगार विवादों की समस्या है, तो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था की जानकारी ले सकते हैं।
New Labour Code 2026 के महत्वपूर्ण सरकारी लिंक
| आधिकारिक स्रोत | उपयोग | लिंक |
|---|---|---|
| श्रम एवं रोजगार मंत्रालय | आधिकारिक अपडेट और अधिसूचनाएँ | वेबसाइट देखें |
| Labour Codes FAQs | आधिकारिक स्पष्टीकरण | PDF देखें |
| Additional Labour Codes FAQs | 16 मार्च 2026 के स्पष्टीकरण | PDF देखें |
| PIB Labour Codes Announcement | प्रभावी तारीख और चारों कोड | प्रेस रिलीज देखें |
| EPFO | भविष्य निधि सेवाएँ | वेबसाइट देखें |
| ESIC | कर्मचारी बीमा सेवाएँ | वेबसाइट देखें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1. चार नए Labour Codes कब से प्रभावी हुए?
भारत सरकार के अनुसार चारों Labour Codes 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुए।
प्रश्न 2. कितने पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत किया गया है?
चार Labour Codes में 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को एकीकृत किया गया है।
प्रश्न 3. भारत के चार Labour Codes कौन से हैं?
Code on Wages, Industrial Relations Code, Code on Social Security और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code।
प्रश्न 4. 50% वेतन नियम क्या है?
वेतन की वैधानिक परिभाषा के अंतर्गत यदि निर्धारित अपवर्जित घटक और भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50% से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि संबंधित गणना के लिए वेतन में जोड़ी जाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी की बेसिक सैलरी CTC की ठीक 50% होना जरूरी है।
प्रश्न 5. क्या हर कर्मचारी का PF अपने आप बढ़ जाएगा?
नहीं। PF योगदान लागू EPF प्रावधानों, वेतन घटकों, योगदान सीमा और कर्मचारी की रोजगार स्थिति पर निर्भर करता है। सभी कर्मचारियों के लिए एक निश्चित राशि से PF अपने आप नहीं बढ़ता।
प्रश्न 6. क्या सभी कर्मचारियों को एक वर्ष बाद ग्रेच्युटी मिलेगी?
नहीं। निर्धारित शर्तों के अंतर्गत पात्र Fixed-Term Employees के लिए विशेष प्रावधान हैं। सामान्य ग्रेच्युटी पात्रता कर्मचारी की श्रेणी और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होती है।
प्रश्न 7. क्या Labour Codes में Gig Workers भी शामिल हैं?
Code on Social Security में Gig Workers और Platform Workers को मान्यता दी गई है तथा पात्र श्रेणियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का ढाँचा शामिल है।
प्रश्न 8. क्या महिलाएँ नए Labour Codes के तहत नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं?
महिलाएँ अपनी सहमति और लागू सुरक्षा शर्तों के अधीन नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं।
प्रश्न 9. क्या सभी राज्यों में समान विस्तृत नियम लागू हैं?
केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को नियम बनाने का अधिकार है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं को अपने राज्य तथा प्रतिष्ठान पर लागू नवीनतम सरकारी अधिसूचनाएँ देखनी चाहिए।
प्रश्न 10. Labour Code की आधिकारिक जानकारी कहाँ मिलेगी?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वेबसाइट पर Labour Codes, FAQs, अधिसूचनाएँ और सरकारी प्रेस रिलीज देख सकते हैं।
Disclaimer / अस्वीकरण
यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह कानूनी सलाह, सरकारी अधिसूचना या Labour Codes की आधिकारिक व्याख्या नहीं है। वास्तविक कर्मचारी अधिकार और नियोक्ता की जिम्मेदारियाँ संबंधित कोड, नियम, अधिसूचनाओं, रोजगार श्रेणी और लागू केंद्र या राज्य सरकार के प्रावधानों पर निर्भर करती हैं। किसी विशेष मामले के लिए आधिकारिक सरकारी अधिसूचना या योग्य श्रम-कानून विशेषज्ञ से सलाह लें। Yojna Portal एक स्वतंत्र सूचना वेबसाइट है और भारत सरकार से संबद्ध नहीं है।