Fast Track Special Courts Scheme 2026: केंद्र सरकार ने ₹3,788 करोड़ की योजना को 5 साल बढ़ाया, अब 850 अदालतें होंगी
केंद्र सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए संचालित Fast Track Special Courts (FTSC) Scheme को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹3,788.04 करोड़ निर्धारित किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान है। इन अदालतों में मुख्य रूप से बलात्कार और Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012 के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाती है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और पीड़ित महिलाओं तथा बच्चों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने में सहायता करना है।
Fast Track Special Courts Scheme 2026: मुख्य जानकारी
योजना: Fast Track Special Courts Scheme
मंजूरी की तारीख: 4 नवंबर 2026
योजना की अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031
कुल बजट: ₹3,788.04 करोड़
केंद्र सरकार का हिस्सा: ₹2,353.15 करोड़
राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्सा: ₹1,434.89 करोड़
वर्तमान कार्यरत अदालतें: 779
प्रस्तावित अदालतें: 850 तक
संबंधित विभाग: न्याय विभाग, कानून एवं न्याय मंत्रालय
मुख्य उद्देश्य: बलात्कार और POCSO मामलों का शीघ्र निपटारा
Fast Track Special Courts Scheme को 5 साल का विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को Fast Track Special Courts की केंद्र प्रायोजित योजना को पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है। यह विस्तार 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगा। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन विशेष अदालतों का संचालन जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बलात्कार और POCSO Act के अंतर्गत दर्ज लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करना है। सरकार ने अदालतों की संख्या बढ़ाने के साथ प्रत्येक अदालत के लिए न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था का प्रावधान भी किया है।
₹3,788.04 करोड़ का बजट कैसे खर्च होगा?
Fast Track Special Courts Scheme के पांच साल के विस्तार के लिए कुल ₹3,788.04 करोड़ का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है। इसमें केंद्र सरकार और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वित्तीय हिस्सेदारी निर्धारित की गई है।
| वित्तीय विवरण | राशि |
|---|---|
| कुल वित्तीय परिव्यय | ₹3,788.04 करोड़ |
| केंद्र सरकार का हिस्सा | ₹2,353.15 करोड़ |
| राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्सा | ₹1,434.89 करोड़ |
| केंद्र का वित्तीय स्रोत | निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) |
| योजना की अवधि | 2026-27 से 2030-31 |
केंद्र सरकार का हिस्सा निर्भया फंड से वित्तपोषित किया जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्धारित केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के वित्तीय पैटर्न के अनुसार सहायता दी जाएगी।
देश में अब 850 तक होंगी Fast Track Special Courts
नई मंजूरी के अनुसार देश में Fast Track Special Courts की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान है। इन अदालतों में विशेष POCSO कोर्ट भी शामिल हैं। अतिरिक्त अदालतों की आवश्यकता का निर्धारण विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बलात्कार तथा POCSO मामलों की लंबित संख्या के आधार पर किया जाएगा।
योजना के विस्तार का उद्देश्य उन जिलों तक विशेष अदालतों की पहुंच बढ़ाना है जहां ऐसे मामलों का लंबित भार अधिक है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 850 अदालतें पहले से कार्यरत हो चुकी हैं। यह संख्या विस्तारित योजना के तहत प्रस्तावित परिचालन लक्ष्य है।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| वर्तमान कार्यरत FTSC | 779 |
| प्रस्तावित कुल FTSC | 850 |
| योजना में भाग लेने वाले राज्य और केंद्रशासित प्रदेश | 29 |
| कार्यरत अदालतों में विशेष POCSO कोर्ट | 399 |
| योजना शुरू होने से निपटाए गए मामले | 4,02,457 |
ये आंकड़े केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से संबंधित आधिकारिक विवरण में दिए गए हैं। अदालतों की वास्तविक संख्या और कार्यक्षमता समय के साथ राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के क्रियान्वयन के अनुसार बदल सकती है।
हर अदालत में न्यायिक अधिकारी और विशेष लोक अभियोजक की व्यवस्था
योजना के अंतर्गत प्रत्येक Fast Track Special Court के लिए समर्पित मानव संसाधन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
- एक समर्पित न्यायिक अधिकारी: प्रत्येक अदालत के लिए एक Judicial Officer की व्यवस्था।
- विशेष लोक अभियोजक: प्रत्येक FTSC के लिए समर्पित Special Public Prosecutor का प्रावधान।
- छह सहायक कर्मचारी: न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए छह Support Staff।
- संचालन खर्च: अदालतों के दैनिक संचालन के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता।
समर्पित न्यायिक अधिकारी और विशेष लोक अभियोजक की व्यवस्था से मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने और लंबित मामलों के निपटारे में सहायता मिलने की उम्मीद है।
Fast Track Special Courts में किन मामलों की सुनवाई होती है?
FTSC Scheme के अंतर्गत विशेष अदालतें मुख्य रूप से दो प्रकार के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए स्थापित की गई हैं:
1. बलात्कार से संबंधित मामले
योजना के अंतर्गत बलात्कार के लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।
2. POCSO Act के अंतर्गत मामले
Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012 के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए Exclusive POCSO Courts का प्रावधान है। इन अदालतों का उद्देश्य बच्चों के अनुकूल और पीड़ित-केंद्रित न्यायिक वातावरण को बढ़ावा देना है।
यह योजना सभी प्रकार के आपराधिक मामलों के लिए सामान्य फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना नहीं है। इसका निर्धारित दायरा बलात्कार और POCSO Act से संबंधित मामलों पर केंद्रित है।
बच्चों और पीड़ितों के अनुकूल होगा न्यायिक वातावरण
योजना में Vulnerable Witness Deposition Centres (VWDCs) और बच्चों के अनुकूल न्यायालयीन स्थानों को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य संवेदनशील मामलों में गवाही देने वाले पीड़ितों, विशेषकर बच्चों, को अतिरिक्त मानसिक परेशानी से बचाते हुए न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने में सहायता करना है।
पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था के अंतर्गत गवाही और सुनवाई के दौरान संवेदनशीलता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। इससे बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक अनुकूल बनाने का लक्ष्य है।
Fast Track Special Courts Scheme की शुरुआत कब हुई थी?
केंद्र सरकार ने Fast Track Special Courts की केंद्र प्रायोजित योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू की थी। यह पहल Criminal Law (Amendment) Act, 2018 के बाद और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुरूप शुरू की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने POCSO Act के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशेष अदालतें स्थापित करने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने बलात्कार और POCSO मामलों की समयबद्ध सुनवाई के लिए समर्पित FTSC और Exclusive POCSO Courts की स्थापना की योजना शुरू की।
योजना को पहले सीमित अवधि के लिए शुरू किया गया था और बाद में इसकी अवधि बढ़ाई गई। अब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।
योजना की निगरानी कैसे होगी?
न्याय विभाग (Department of Justice) इस योजना को संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर लागू करेगा। अदालतों के कामकाज और प्रगति की निगरानी के लिए कई व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं।
- FTSC Dashboard के माध्यम से अदालतों के प्रदर्शन की निगरानी।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करना।
- व्यय विवरण (Expenditure Statements) की समीक्षा।
- हाई कोर्ट और राज्य सरकारों के साथ परामर्श।
- लंबित बलात्कार और POCSO मामलों के निपटारे की प्रगति का आकलन।
अदालतों के प्रदर्शन और लंबित मामलों की स्थिति के आधार पर योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा की जाएगी।
Fast Track Special Courts Scheme 2026 का महिलाओं और बच्चों को क्या लाभ होगा?
इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी बलात्कार और POCSO Act के तहत यौन अपराधों के पीड़ित महिलाएं और बच्चे हैं। विशेष अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों में सुनवाई को प्राथमिकता देकर न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करना है।
- बलात्कार और POCSO मामलों के शीघ्र निपटारे को बढ़ावा।
- लंबित मामलों की संख्या कम करने का प्रयास।
- बच्चों के अनुकूल न्यायिक वातावरण को प्रोत्साहन।
- पीड़ितों की गवाही के लिए बेहतर व्यवस्थाओं का विकास।
- विशेष लोक अभियोजक और न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से समर्पित सुनवाई व्यवस्था।
- अतिरिक्त जिलों तक विशेष अदालतों की पहुंच बढ़ाने की संभावना।
Fast Track Special Courts Scheme 2026: महत्वपूर्ण तारीखें
| विवरण | तारीख |
|---|---|
| योजना की शुरुआत | 2 अक्टूबर 2019 |
| सुप्रीम कोर्ट का संबंधित निर्देश | 25 जुलाई 2019 |
| नई मंजूरी की तारीख | 4 नवंबर 2026 |
| विस्तारित अवधि की शुरुआत | 1 अप्रैल 2026 |
| विस्तारित योजना की अंतिम तारीख | 31 मार्च 2031 |
Fast Track Special Courts Scheme 2026: आधिकारिक जानकारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी: प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी
न्याय विभाग: Department of Justice की वेबसाइट
कानून एवं न्याय मंत्रालय: आधिकारिक वेबसाइट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Fast Track Special Courts Scheme 2026 क्या है?
यह केंद्र प्रायोजित योजना है जिसके तहत बलात्कार और POCSO Act, 2012 से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतें संचालित की जाती हैं।
2. Fast Track Special Courts Scheme को कितने साल बढ़ाया गया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को पांच साल के लिए, 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।
3. योजना का कुल बजट कितना है?
विस्तारित योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹3,788.04 करोड़ है।
4. अब देश में कितनी Fast Track Special Courts होंगी?
योजना के तहत अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान है। यह प्रस्तावित लक्ष्य है, सभी 850 अदालतों के पहले से कार्यरत होने की पुष्टि नहीं है।
5. केंद्र सरकार इस योजना में कितना पैसा देगी?
केंद्र सरकार का हिस्सा ₹2,353.15 करोड़ है, जिसे निर्भया फंड से वित्तपोषित किया जाएगा।
6. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा कितना है?
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कुल निर्धारित हिस्सा ₹1,434.89 करोड़ है।
7. FTSC में किन मामलों की सुनवाई होती है?
इन अदालतों में बलात्कार और POCSO Act, 2012 के तहत दर्ज यौन अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाती है।
8. प्रत्येक Fast Track Special Court में कितने कर्मचारी होंगे?
योजना में प्रत्येक अदालत के लिए एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों का प्रावधान है।
9. Fast Track Special Courts Scheme कब शुरू हुई थी?
यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई थी।
10. योजना की निगरानी कौन करेगा?
न्याय विभाग (Department of Justice) संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर योजना की निगरानी और क्रियान्वयन करेगा।
निष्कर्ष
Fast Track Special Courts Scheme 2026 को पांच साल का विस्तार मिलने से बलात्कार और POCSO मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का संचालन जारी रहेगा। ₹3,788.04 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत प्रत्येक अदालत के लिए न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही बच्चों के अनुकूल न्यायिक वातावरण, पीड़ित-केंद्रित प्रक्रिया और लंबित मामलों की निगरानी पर जोर दिया गया है। योजना का वास्तविक प्रभाव राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह लेख भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी मंत्रिमंडल संबंधी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। 850 अदालतों की संख्या विस्तारित योजना के अंतर्गत प्रस्तावित परिचालन लक्ष्य है। अदालतों की वास्तविक उपलब्धता, कार्यरत संख्या और राज्यवार क्रियान्वयन के लिए न्याय विभाग की नवीनतम आधिकारिक जानकारी देखें।