आजीविका सहायता कार्यक्रम आजीविका सहायता कार्यक्रम आजीविका सहायता कार्यक्रम
पात्र लाभार्थियों की आय, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने वाली वित्तीय एवं आजीविका सहायता। पात्र लाभार्थियों की आय, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने वाली वित्तीय एवं आजीविका सहायता।
योजना विवरण
संक्षिप्त विवरण: आजीविका सहायता कार्यक्रम (Livelihood Assistance Programme)
ग्रामीण एवं शहरी आजीविका मिशन और राज्य समाज कल्याण विभागों द्वारा संचालित प्रमुख स्वरोजगार एवं गरीबी उन्मूलन योजना, जिसके तहत जरूरतमंद नागरिकों, कारीगरों और महिला समूहों को नए काम शुरू करने हेतु मुफ्त टूलकिट, रिवॉल्विंग फंड और पूंजीगत अनुदान दिया जाता है।
आजीविका सहायता कार्यक्रम क्या है?
आजीविका सहायता कार्यक्रम (Livelihood Assistance Programme) का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सिर्फ मजदूरी पर निर्भर न रखकर उन्हें अपना स्वयं का छोटा व्यवसाय शुरू करने योग्य बनाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक कारीगरों, बेरोजगार युवाओं और स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को सिलाई मशीन, बढ़ई-लोहार औजार, ब्यूटी पार्लर किट, पशुपालन और छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए मुफ्त टूलकिट, रिवॉल्विंग फंड और 35% तक का पूंजीगत अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
योजना के प्रमुख घटक और सहायता राशि
| सहायता घटक | लक्षित लाभार्थी | अनुदान व वित्तीय सहायता का स्वरूप |
|---|---|---|
| मुफ्त टूलकिट व उपकरण वितरण | पारंपरिक कारीगर, दर्जी, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर आदि | 100% निशुल्क आधुनिक टूलकिट (मूल्य ₹15,000 से ₹25,000) |
| रिवॉल्विंग फंड (Revolving Fund) | महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) | ₹15,000 से ₹30,000 प्रति समूह (आंतरिक बचत व उधारी हेतु) |
| सामुदायिक निवेश फंड (CIF Grant) | सक्रिय ग्राम संगठन और क्लस्टर | ₹1.50 लाख से ₹2.50 लाख प्रति समूह (व्यवसाय विस्तार हेतु) |
| व्यक्तिगत सूक्ष्म उद्यम सब्सिडी | प्रशिक्षित युवा व एकल उद्यमी | बैंक ऋण से जुड़ी 25% से 35% तक की पूंजीगत सब्सिडी |
आजीविका सहायता कार्यक्रम के प्रमुख लाभ
- बिना कर्ज का बोझ: आधुनिक टूलकिट और बुनियादी उपकरण शत-प्रतिशत सरकारी सहायता पर मिलते हैं, जिससे कारीगरों को शुरुआत में लोन नहीं लेना पड़ता।
- कौशल विकास के साथ जुड़ाव: उपकरण वितरण से पहले संबंधित व्यवसाय में तकनीकी प्रशिक्षण और सरल वित्तीय प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाती है।
- बाजार की सीधी सुविधा: तैयार उत्पादों को बेचने के लिए जिला प्रदर्शनियों, सरस मेलों और सरकारी विपणन आउटलेट्स से जोड़ा जाता है।
- महिला सशक्तिकरण पर बल: ग्रामीण महिलाओं को समूह के माध्यम से किराना दुकान, मसाला पिसाई, मुर्गीपालन व हस्तशिल्प जैसे कार्यों में आत्मनिर्भर बनाया जाता है।
पात्रता (Eligibility Criteria)
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए और आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- परिवार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से संबंधित होना चाहिए।
- महिला मुखिया, विधवाओं, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति/जनजाति और ग्रामीण कारीगरों को चयन में प्राथमिकता दी जाती है।
- आवेदक ने पिछले 3 वर्षों के भीतर किसी अन्य सरकारी योजना से समान उपकरण या अनुदान न लिया हो।
आवेदन और चयन की पूरी प्रक्रिया
- अपने राज्य के राज्य आजीविका मिशन (SRLM) पोर्टल अथवा जिला समाज कल्याण/उद्योग केंद्र पर संपर्क करें।
- अपनी ग्राम पंचायत, ग्राम संगठन (VO) या ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) के माध्यम से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें या भरें।
- जरूरी दस्तावेज संलग्न करें: आधार कार्ड, राशन कार्ड/आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, कौशल प्रशिक्षण प्रमाण और बैंक पासबुक।
- ग्राम सभा अथवा ब्लॉक स्तरीय आजीविका चयन समिति द्वारा पात्रता और पारिवारिक स्थिति की जांच की जाती है।
- स्वीकृति मिलने पर निर्धारित केंद्र पर टूलकिट का वितरण किया जाता है और वित्तीय सहायता राशि सीधे बैंक खाते में DBT द्वारा जमा की जाती है।