सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP)
MSEs के लिए common facilities, infrastructure, technology, skills, quality और market access को सहायता देने वाली क्लस्टर विकास योजना। MSEs के लिए common facilities, infrastructure, technology, skills, quality और market access को सहायता देने वाली क्लस्टर...
योजना विवरण
संक्षिप्त विवरण: सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP)
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की प्रमुख बुनियादी ढांचा विकास योजना, जिसका उद्देश्य एक ही क्षेत्र के छोटे उद्योगों को समूह (Cluster) के रूप में संगठित कर कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) और औद्योगिक पार्कों के निर्माण पर 80% तक केंद्रीय अनुदान देना है।
MSE-CDP योजना क्या है?
सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) व्यक्तिगत फैक्ट्री को अलग से लोन देने के बजाय किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में एक जैसे उत्पाद बनाने वाले उद्यमों के पूरे क्लस्टर को उन्नत बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत आधुनिक टेस्टिंग लैब्स, डिजाइन सेंटर, साझा मशीनरी टूल्स, सड़क, जल निकासी और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) जैसे कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित करने के लिए सरकार 70% से 80% तक का गैर-वापसी योग्य केंद्रीय अनुदान (Grant) देती है।
योजना की मुख्य विशेषताएं व वित्तीय अनुदान स्लैब
| प्रोजेक्ट घटक | अधिकतम प्रोजेक्ट लागत | सरकारी अनुदान (Grant) हिस्सा |
|---|---|---|
| कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) | ₹30 करोड़ तक | 70% सामान्य क्लस्टर हेतु (80% पूर्वोत्तर, आकांक्षी जिले व महिला/SC/ST क्लस्टर हेतु) |
| नया औद्योगिक क्षेत्र विकास (Infrastructure) | ₹15 करोड़ तक (फ्लैटेड फैक्ट्री हेतु ₹10 करोड़) | 60% सामान्य क्षेत्र (70% पूर्वोत्तर एवं विशेष राज्यों हेतु) |
| मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का अपग्रेडेशन | ₹10 करोड़ तक | 60% अनुदान (विशेष श्रेणी क्षेत्रों हेतु 70%) |
क्लस्टर विकास योजना के प्रमुख लाभ
- महंगी आधुनिक मशीनरी का साझा उपयोग: छोटे उद्यमी सीएनसी टूल्स, 3डी प्रिंटिंग और क्वालिटी टेस्टिंग लैब्स का उपयोग बिना करोड़ों रुपये की निजी मशीनें खरीदे कर सकते हैं।
- विश्वस्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचा: औद्योगिक क्षेत्रों में पक्की सड़कें, जल निकासी, निर्बाध बिजली सबस्टेशन, प्रदूषण नियंत्रण (ETP) और रॉ-मटीरियल गोदामों का निर्माण।
- कच्चे माल की थोक खरीद में बचत: क्लस्टर में एक साथ कच्चा माल खरीदने से लागत घटती है और मोलभाव की क्षमता बढ़ती है।
- वैश्विक स्तर पर निर्यात क्षमता: साझा लैब और प्रमाणन केंद्रों के माध्यम से तैयार उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाता है।
पात्रता (Eligibility Criteria)
- एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थित कम से कम 20 पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों द्वारा एक Special Purpose Vehicle (SPV) का गठन अनिवार्य है।
- SPV में किसी भी एक उद्यमी की इक्विटी हिस्सेदारी 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- सभी सदस्य इकाइयों के पास वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन (Udyam Certificate) होना आवश्यक है।
- प्रस्तावित सीएफसी (CFC) के लिए भूमि या तो राज्य सरकार की होनी चाहिए या SPV के पास कम से कम 30 वर्ष की लीज पर होनी चाहिए।
आवेदन और परियोजना स्वीकृति की प्रक्रिया
- क्लस्टर की पात्र एमएसएमई इकाइयों को संगठित कर कंपनी अधिनियम के तहत एक गैर-लाभकारी SPV का पंजीकरण करें।
- क्लस्टर की जरूरतों और वित्तीय व्यवहार्यता को दर्शाने वाली विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करें।
- राज्य उद्योग विभाग या सीधे cluster.dcmsme.gov.in ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन अपलोड करें।
- राज्य स्तरीय संचालन समिति (SLSC) के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव MSME मंत्रालय की राष्ट्रीय संचालन समिति (NLSC) के पास भेजा जाता है।
- स्वीकृति मिलने पर केंद्रीय अनुदान की किश्तें सीधे बैंक एस्क्रो खाते में जारी की जाती हैं ताकि निर्माण और मशीनरी स्थापना का कार्य शुरू हो सके।