सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम - अवसंरचना विकास सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम - अवसंरचना विकास सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम - अवसंरचना विकास
नए और मौजूदा industrial areas तथा MSME clusters के लिए infrastructure development सहायता। नए और मौजूदा industrial areas तथा MSME clusters के लिए infrastructure development सहायता।
योजना विवरण
संक्षिप्त विवरण: सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम - बुनियादी ढांचा विकास (Infrastructure Development)
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की विशेष पहल, जिसका उद्देश्य नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, बहुमंजिला फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स बनाने और पुराने औद्योगिक पार्कों को उन्नत करने के लिए 70% तक केंद्रीय अनुदान (Grant) प्रदान करना है।
MSE-CDP बुनियादी ढांचा विकास घटक क्या है?
छोटे उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उन्हें अपनी फैक्ट्री लगाने के लिए सस्ती विकसित जमीन, निर्बाध बिजली, पक्की सड़क और पानी की सुविधा नहीं मिल पाती। MSE-CDP बुनियादी ढांचा विकास (ID) योजना के तहत राज्य सरकारों की औद्योगिक विकास एजेंसियों और उद्यमियों के समूह (SPV) को नए औद्योगिक क्षेत्र बसाने और आधुनिक फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स (Flatted Factories) बनाने के लिए 60% से 70% तक का एकमुश्त केंद्रीय अनुदान दिया जाता है।
वित्तीय अनुदान और प्रोजेक्ट लागत का विवरण
| बुनियादी ढांचा घटक | अधिकतम प्रोजेक्ट लागत | सरकारी अनुदान (Central Grant) |
|---|---|---|
| नया ग्रीनफील्ड औद्योगिक क्षेत्र (New Industrial Estate) | ₹15.00 करोड़ तक | प्रोजेक्ट लागत का 60% (पूर्वोत्तर, आकांक्षी जिले व पहाड़ी राज्यों हेतु 70%) |
| बहुमंजिला फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स (Flatted Factory) | ₹10.00 करोड़ तक | प्रोजेक्ट लागत का 60% (विशेष राज्यों व SC/ST/महिला बाहुल्य क्लस्टर हेतु 70%) |
| मौजूदा औद्योगिक पार्कों का आधुनिकीकरण (Upgradation) | ₹10.00 करोड़ तक | प्रोजेक्ट लागत का 60% (पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों हेतु 70%) |
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास योजना के मुख्य लाभ
- प्लग-एंड-प्ले फ्लैटेड फैक्ट्री: गैर-प्रदूषणकारी सूक्ष्म उद्योगों (जैसे गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी) के लिए बहुमंजिला इमारतों में तैयार शेड, जहां बिजली, लिफ्ट और पानी की पहले से सुविधा होती है।
- पक्की सड़कें और बिजली सबस्टेशन: औद्योगिक पार्कों में भारी वाहनों हेतु चौड़ी कंक्रीट सड़कें, ड्रेनेज नेटवर्क, स्ट्रीट लाइट्स और समर्पित बिजली ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाते हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र (CETP): क्लस्टर में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने हेतु अनुदान, जिससे छोटी इकाइयों को अलग से महंगा प्रदूषण प्लांट नहीं लगाना पड़ता।
- सस्ते दामों पर प्लॉट आवंटन: परियोजना पर 70% तक सरकारी सब्सिडी मिलने से औद्योगिक भूखंड और शेड छोटे उद्यमियों को बाजार से काफी कम कीमत पर आवंटित होते हैं।
पात्रता (Eligibility Criteria)
- प्रस्ताव राज्य औद्योगिक विकास निगम (SIDC), राज्य उद्योग निदेशालय या एमएसएमई उद्यमियों की पंजीकृत Special Purpose Vehicle (SPV) द्वारा भेजा जाना चाहिए।
- आवंटन के पात्र सभी उद्यमों के पास वैध और सक्रिय उद्यम रजिस्ट्रेशन (Udyam Certificate) होना आवश्यक है।
- नए औद्योगिक पार्क हेतु न्यूनतम 10 एकड़ भूमि (पहाड़ी राज्यों और फ्लैटेड फैक्ट्री के लिए 2-4 एकड़) होनी चाहिए।
- प्रस्तावित भूमि का स्वामित्व विवाद-मुक्त होना चाहिए अथवा राज्य प्राधिकरण के पास न्यूनतम 30 वर्षों की लीज पर होना चाहिए।
परियोजना स्वीकृति और आवेदन प्रक्रिया
- राज्य एजेंसी या उद्योग समूह (SPV) सिविल लेआउट, वित्तीय खर्च और प्लॉट योजना के साथ एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करता है।
- प्रस्ताव और राज्य के वित्तीय हिस्से की प्रतिबद्धता आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल cluster.dcmsme.gov.in पर अपलोड की जाती है।
- राज्य के उद्योग प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय संचालन समिति (SLSC) प्रस्ताव की तकनीकी जांच कर मंजूरी देती है।
- SLSC की संस्तुति के बाद केंद्रीय MSME मंत्रालय की राष्ट्रीय संचालन समिति (NLSC) परियोजना का अंतिम मूल्यांकन कर बजट स्वीकृत करती है।
- स्वीकृति मिलने पर केंद्रीय अनुदान की राशि चरणों में एस्क्रो खाते में जारी की जाती है ताकि सड़कें, बिजली लाइनें और शेड निर्माण का कार्य पूरा किया जा सके।